
अद्वैत किसी भूखे दरिंदे की तरह इशिरा के ऊपर झुक गया।उसकी आँखों में वहशियत की आग जल रही थी—एक ऐसी आग जो न सिर्फ़ उसके शरीर को जलाना चाहती थी, बल्कि उसकी रूह को भी राख कर देना चाहती थी।
"क्यों न मैं तुम्हें नए-नए तरीके सिखा दूँ, इशिरा? ताकि अगले क्लाइंट के बिस्तर पर तुम्हारी कीमत दोगुनी हो जाए?" उसकी आवाज़ में ज़हर और जलन घुली हुई थी। "मार्केट में नई चीज़ों की डिमांड बहुत ज़्यादा होती है... और मैं तुम्हें इतना तोड़ दूँगा कि तुम कभी पुरानी वाली नहीं रहोगी।"







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