
Ab aage....
रात की खामोशी गहरी हो चुकी थी। शौर्य ने बहुत ही आहिस्ता से वामिका की ड्रिप निकाली, क्योंकि दवा की आख़िरी बूंद उसके शरीर में उतर चुकी थी। उसने वामिका के जले हुए बदन को एक मखमली चादर से ढक दिया और खुद उसके करीब लेट गया। उसका भारी हाथ बहुत ही नरमी से वामिका की कमर पर टिका हुआ था, मानो वह बेहोशी में भी उस पर अपना पहरा दे रहा हो।






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