
Ab aage....
होटल के उस खौफनाक और भारी ड्रामे के बाद, जब अगली सुबह गुवाहाटी के आसमान पर सूरज की पहली सुनहरी किरण चमकी, तो इशिरा की आँखें एक अजीब सी भारीपन के साथ खुलीं। रात भर का वो अजीब सा डर, माइग्रेन का वो खौफनाक दर्द और अद्वैत रायचंद के उस अचानक सामने आने का सदमा अब धीरे-धीरे शांत हो चुका था। लेकिन उसके **** और दिमाग में एक बेइंतहा थकान छाई हुई थी। उसका पूरा बदन जैसे पूरी तरह से Emotion-less महसूस कर रहा था, मानो उसकी रूह के भीतर से किसी ने सारी ताकत खींच ली हो।








Write a comment ...