
Ab aage...
अगले दिन, प्रार्थना ज़बरदस्ती इशिरा को घर से बाहर खींच लाई और उसे लेकर शहर के उसी जाने-माने कैफ़ेटेरिया में पहुँची। इशिरा का मन अब भी अशांत था, लेकिन प्रार्थना की ज़िद के आगे वह बेबस थी। दोनों एक टेबल पर बैठी ही थीं कि विहान वहाँ आ पहुँचा। लेकिन जैसे ही इशिरा की नज़र विहान के पीछे खड़े लंबे, चौड़े और सूट पहने उस शख्स पर पड़ी, उसका कलेजा मुंह को आ गया।








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