
Ab aage.........
पेरिस में जहाँ ताविश अपनी जूनून की आग में सुलग रहा था, वहीं राजवंश मेंशन का वो सन्नाटा अब सिया को अंदर ही अंदर निगल रहा था। पूरा दिन कमरे में अकेले घुटने के बाद अब रात का वक्त हो चुका था। खाली बेडरूम में ताविश की यादों से अपना पीछा छुड़ाने के लिए सिया नीचे लिविंग रूम में आ गई, जहाँ गायत्री जी आराम से बैठी हुई थीं।







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