
Ab aage........
अगली सुबह सिया की आँखें सूरज की पहली किरण के साथ खुलीं। आज उसके मन में एक अजीब सी फुर्ती थी। वह बिस्तर से उठी, ताविश के खाली कमरे को एक बार प्यार से निहारा और सीधे किचन की तरफ बढ़ गई। आज उसने नौकरों को छुट्टी दे दी और खुद सबके लिए नाश्ता तैयार करने लगी। गायत्री जी जब नीचे आईं, तो सिया को काम करते देख उनकी आँखें भर आईं। सिया ने बहुत प्यार से उन्हें नाश्ता कराया, उनकी तबीयत चेक की और फिर कॉलेज के लिए निकल गई।




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