
Ab aage........
सिया हिम्मत जुटाकर अपने बेडरूम के भारी दरवाज़े से बाहर निकली। उसका दिल इतनी तेज़ी से धड़क रहा था मानो सीने को चीरकर बाहर आ जाएगा। उसने अपने काँपते हाथों से दुपट्टे के कोनों को कसकर भींच लिया और पूरे मेंशन में ताविश को हर जगह ढूंढा। वह सीढ़ियों से नीचे उतरी, लिविंग रूम, डाइनिंग हॉल, यहाँ तक कि लॉन में भी जाकर देखा, लेकिन ताविश कहीं नहीं था। सीढ़ियों के पास खड़े रामू काका से जब उसने बेहद सहमी हुई आवाज़ में पूछा, तो उन्होंने नज़रें झुकाकर बताया कि छोटे मालिक तो सुबह 7 बजे ही कंपनी के लिए निकल चुके थे।







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