
Ab aage.....
नीचे किचन में सुबह की सरगर्मी शुरू हो चुकी थी। वामिका ने अपने चेहरे पर उस बनावटी मुस्कान को इतनी शिद्दत से ओढ़ रखा था कि बाहर से कोई उसके भीतर के तूफ़ान का अंदाज़ा नहीं लगा सकता था।


Ab aage.....
नीचे किचन में सुबह की सरगर्मी शुरू हो चुकी थी। वामिका ने अपने चेहरे पर उस बनावटी मुस्कान को इतनी शिद्दत से ओढ़ रखा था कि बाहर से कोई उसके भीतर के तूफ़ान का अंदाज़ा नहीं लगा सकता था।

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