Ab aage....
उधर हॉस्टल के कमरे में प्रगति की सुबह बेहद खुशनुमा थी। रात की उस डरावनी धमकी के बाद वह डरी हुई तो थी, लेकिन सुबह खिड़की से आती धूप को देखकर उसका मन थोड़ा शांत हुआ। वह अपनी बुक्स समेट रही थी कि तभी उसके फोन की स्क्रीन चमक उठी—'शानवी'।

Ab aage....
उधर हॉस्टल के कमरे में प्रगति की सुबह बेहद खुशनुमा थी। रात की उस डरावनी धमकी के बाद वह डरी हुई तो थी, लेकिन सुबह खिड़की से आती धूप को देखकर उसका मन थोड़ा शांत हुआ। वह अपनी बुक्स समेट रही थी कि तभी उसके फोन की स्क्रीन चमक उठी—'शानवी'।

Write a comment ...
Write a comment ...