
Ab aage.........
अंधेरे, हल्की रोशनी और ताज़ी कॉफी की खुशबू से भरे उस किचन में सिया दोनों हाथों से स्लैब के किनारों को कसकर पकड़े खड़ी थी। वह अपनी उखड़ी हुई सांसों को संभालने और रोने को रोकने की नाकाम कोशिश कर रही थी। उसका पूरा बदन डर और घबराहट से काँप रहा था। दिल की धड़कनें इतनी तेज़ थीं मानो पसलियों का पिंजरा तोड़कर अभी बाहर आ जाएँगी।







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