
Ab aage........
ताविश की ज़हरीली, भारी आवाज़ सिया के कानों में पिघले सीसे की तरह उतर रही थी। ताविश ने आशवी जी की तरफ रुख किया और एक बेहद शराफ़त भरा मुखौटा ओढ़ते हुए कहा: "आंटी... अस्पताल की सारी formalities पूरी हो चुकी हैं। और बाहर बर्फीली हवाएं चल रही हैं, ऐसे में आपका किसी लोकल कैब से जाना ठीक नहीं होगा। मेरी गाड़ी बाहर खड़ी है, मैं आप दोनों को घर छोड़ देता हूँ।"





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